मैं तो मुशायरों में रहा पर कभी गीत गजल मेरी न थी रोज नमाज में अजान की मैं तो श…

मैं तो मुशायरों में रहा
पर कभी गीत गजल मेरी न थी

रोज नमाज में अजान की

मैं तो शायर था
पर दगाबाजी मेरे खून में थी

मैं मरता,क्या न करता
शायरी जो मेरी न थी

बेटा तबरेज गुनेगार है तू मेरा
तुझसे तो अच्छी मां थी

जानती थी वो,धोखाधड़ी हमारी कौम में है
पर तुझसे तो वफादार थी। https://t.co/8ow9oUjDVl
मैं तो मुशायरों में रहा
पर कभी गीत गजल मेरी न थी

रोज नमाज में अजान की

मैं तो श…

मैं तो मुशायरों में रहा
पर कभी गीत गजल मेरी न थी

रोज नमाज में अजान की

मैं तो शायर था
पर दगाबाजी मेरे खून में थी

मैं मरता,क्या न करता
शायरी जो मेरी न थी

बेटा तबरेज गुनेगार है तू मेरा
तुझसे तो अच्छी मां थी

जानती थी वो,धोखाधड़ी हमारी कौम में है
पर तुझसे तो वफादार थी। https://t.co/8ow9oUjDVl
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Twitter shayarish by Anup Tripathi

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