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ना कोई ख़लिश हो,ना कोई गिला चाहता है 
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मुद्दतों-बाद-आज-मुस्कुराने-को-जी-चाहता-है-ना-कोई

मुद्दतों बाद आज मुस्कुराने को जी चाहता है ना कोई ख़लिश हो,ना कोई गिला चाहता है …

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मुद्दतों बाद आज मुस्कुराने को जी चाहता है
ना कोई ख़लिश हो,ना कोई गिला चाहता है
देखूँ न मुड़कर, जिस दर पे मुक़द्दर था रोया…
हो झूठा मगर संग तुम्हारे,रह-गुज़र चाहता है।

-कौशल 🌹
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Source by Kaushal Kishor Jha (Adv.)

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