मुकद्दर में किसी के हूर औऱ अँगूर होते हैं, हमारे ख़्वाब रोटी के भी चखनाचूर होते …

[ad_1]

मुकद्दर में किसी के हूर औऱ अँगूर होते हैं,
हमारे ख़्वाब रोटी के भी चखनाचूर होते हैं,
कुछ अधूरे ख़्वाब रह जाते हैं आँखों में दफ़्न,
कुछ अधूरी ख़्वाहिशों के साथ मर जाना पड़ता है,
~विपुल तिवारी
#vipultiwaripoem
#हिंदी_शब्द #शायरांश
#शायरी #बज़्म
[ad_2]

Source by विकास तिवारी