You are currently viewing मदहोश होने लगते हैं….
     मेरी शायरी के अलफ़ाज़ इस कदर ….
       जब शुरू हो…
मदहोश-होने-लगते-हैं-मेरी-शायरी-के-अलफ़ाज़-इस-कदर

मदहोश होने लगते हैं…. मेरी शायरी के अलफ़ाज़ इस कदर …. जब शुरू हो…

[ad_1]

मदहोश होने लगते हैं….
मेरी शायरी के अलफ़ाज़ इस कदर ….
जब शुरू होता हैं मेरा लिखना उसे …
सोचकर https://t.co/i82jnBSa0N
[ad_2]

Source by krishan kumar yadav

Leave a Reply