बिछा के खुशी की चादर ग़मों से किनारा कर लें क्यों न कोशिश की जाए क्यों न प्रेम द…

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बिछा के खुशी की चादर
ग़मों से किनारा कर लें
क्यों न कोशिश की जाए
क्यों न प्रेम दुबारा कर लें
क्या ज़रूरत है किसी और काँधे की
खुद को खुद का सहारा कर लें
उनसे प्रेम कर के देख तो लिया
अबकी खुद का खुद से गुज़ारा कर लें ।।
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Source by Shukla ji ( self written poems nd 2 liners)