बस की क्या बात है, हम बस में ही रहते हैं, हर घड़ी थोड़ी न हम यूँ ही पीते रहते है…

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बस की क्या बात है, हम बस में ही रहते हैं,
हर घड़ी थोड़ी न हम यूँ ही पीते रहते हैं,
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Source by विकास तिवारी

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