नादां परिंदा हूँ टूट कर विखर जाऊँगा, कितना भी उडुन आसां में लौट के घोंसले में आऊ…

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नादां परिंदा हूँ टूट कर विखर जाऊँगा,
कितना भी उडुन आसां में लौट के घोंसले में आऊँगा,
तमाम आयेंगे मुझे देखने वाले,
तब फ़िक्र न होगी कौन आया था देखने मुझे,
#विपुलतिवारी
#बज़्म
#हिंदी_शब्द #शायरांश
#शायरी
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Source by विकास तिवारी

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