You are currently viewing नफ़स से आह निकले तो सोचो तलातुम कितना है दिल के रेज़ा-रेज़ा में,

मकदूर तुम अपने…
-से-आह-निकले-तो-सोचो-तलातुम-कितना-है-दिल

नफ़स से आह निकले तो सोचो तलातुम कितना है दिल के रेज़ा-रेज़ा में, मकदूर तुम अपने…

नफ़स से आह निकले तो सोचो तलातुम कितना है दिल के रेज़ा-रेज़ा में,

मकदूर तुम अपने हुस्न की करती हो गर हो न तुम खलब्त तो मानु मुस्तकिल कितनी हो तो मानु।।

@452 ✍️✍️रंजीत

#शायरांश #शायरी #सरस #बज़्म #हिंदी_शब्द #काव्य_कृति #काव्य @_kaavyansh_ https://t.co/BLJ4Yly6xQ
नफ़स से आह निकले तो सोचो तलातुम कितना है दिल के रेज़ा-रेज़ा में,

मकदूर तुम अपने…

नफ़स से आह निकले तो सोचो तलातुम कितना है दिल के रेज़ा-रेज़ा में,

मकदूर तुम अपने हुस्न की करती हो गर हो न तुम खलब्त तो मानु मुस्तकिल कितनी हो तो मानु।।

@452 ✍️✍️रंजीत

#शायरांश #शायरी #सरस #बज़्म #हिंदी_शब्द #काव्य_कृति #काव्य @_kaavyansh_ https://t.co/BLJ4Yly6xQ
#नफस #स #आह #नकल #त #सच #तलतम #कतन #ह #दल #क #रजरज #ममकदर #तम #अपन

Twitter shayarish by Ranjeet

Leave a Reply