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कुछ हाथों की बन कठपुतली, इस माटी में बने ढले,
हाथों में ब…
-तुम-मेरे-जैसे-हो-कुछ-हाथों-की-बन-कठपुतली

दीपक तुम मेरे जैसे हो, कुछ हाथों की बन कठपुतली, इस माटी में बने ढले, हाथों में ब…

दीपक तुम मेरे जैसे हो,
कुछ हाथों की बन कठपुतली, इस माटी में बने ढले,
हाथों में बाती को लेकर, जाने किस घर तपे, जले।

~ नितिन कुमार हरित/#NitinKrHarit

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दीपक तुम मेरे जैसे हो,
कुछ हाथों की बन कठपुतली, इस माटी में बने ढले,
हाथों में ब…

दीपक तुम मेरे जैसे हो,
कुछ हाथों की बन कठपुतली, इस माटी में बने ढले,
हाथों में बाती को लेकर, जाने किस घर तपे, जले।

~ नितिन कुमार हरित/#NitinKrHarit

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Twitter shayarish by नितिन कुमार ‘हरित’

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