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किसी गैर के हाथों में देखा जिस रोज़ से ,

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दब-गया-हूं-मोहब्बत-के-बोझ-से-किसी-गैर

दब गया हूं मोहब्बत के बोझ से , किसी गैर के हाथों में देखा जिस रोज़ से , …

दब गया हूं मोहब्बत के बोझ से ,
किसी गैर के हाथों में देखा जिस रोज़ से ,

~कवि रवि🍁

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#बज़्म #शायरी #हिंदी_शब्द https://t.co/hH9aBGqhM9
दब गया हूं मोहब्बत के बोझ से ,
किसी गैर के हाथों में देखा जिस रोज़ से ,


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~कवि रवि🍁

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Twitter shayarish by कवि रवि रंजन 🍁

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