तुझे दूर से चाहना मंजूर है मुझे मेरी इस इबादत पर गुरुर है मुझे तुझे अपने लफ्जो म…

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तुझे दूर से चाहना मंजूर है मुझे
मेरी इस इबादत पर गुरुर है मुझे
तुझे अपने लफ्जो में बसा कर रखूंगी
अपनी शायरी में छुपा कर रखूंगी
चाँद सा है तू ,मैं चांदनी नहीं
मैं खुद को ज़मी बना कर रखूंगी ।।
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Source by नेहा सिंह😎

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