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तिरी दास्ताँ कोई और थी मिरा …
-दुश्मनों-की-ख़बर-न-थी-मुझे-दोस्तों-का-पता

तुझे दुश्मनों की ख़बर न थी मुझे दोस्तों का पता नहीं तिरी दास्ताँ कोई और थी मिरा …

तुझे दुश्मनों की ख़बर न थी मुझे दोस्तों का पता नहीं
तिरी दास्ताँ कोई और थी मिरा वाक़िआ कोई और है ।।
✍ #सलीमकौसर #दोस्ती #वाक़िया #दास्ताँ #शायरी #शब्दनिधि #Shayri https://t.co/FVUUfhXAMr
तुझे दुश्मनों की ख़बर न थी मुझे दोस्तों का पता नहीं
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तिरी दास्ताँ कोई और थी मिरा वाक़िआ कोई और है ।।
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Twitter shayarish by At the edge of sunshine !!!

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