ताउम्र हम तरस गए इक गुल के लिए, और कब्र हमारी गुलज़ार है दरख़्त-ए-गुल के तले, ये…

ताउम्र हम तरस गए इक गुल के लिए,
और कब्र हमारी गुलज़ार है दरख़्त-ए-गुल के तले,
ये था सितम या है ये करम ऐ मालिक़ मेरे!
दुश्मन भी मेरे आज़ दोस्ती की मिसालें दे रहे मेरे।
#poem #हिंदी #शायरी #मुक्तक #मेरेशब्द #कविता #हिन्दीसाहित्य #HindiShayar #literature #LiteraturePosts #dil #heart
ताउम्र हम तरस गए इक गुल के लिए,
और कब्र हमारी गुलज़ार है दरख़्त-ए-गुल के तले,
ये…

ताउम्र हम तरस गए इक गुल के लिए,
और कब्र हमारी गुलज़ार है दरख़्त-ए-गुल के तले,
ये था सितम या है ये करम ऐ मालिक़ मेरे!
दुश्मन भी मेरे आज़ दोस्ती की मिसालें दे रहे मेरे।
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Twitter shayarish by Jooly Jaiswal

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