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वो प्रेम की प्रकृति को कभ
-सही-और-गलत-पसंद-और-नापसंद-में-ही-फंस

जो सही और गलत, पसंद और नापसंद में ही फंस कर रह गया है, वो प्रेम की प्रकृति को कभ



जो सही और गलत, पसंद और नापसंद में ही फंस कर रह गया है,
वो प्रेम की प्रकृति को कभी नहीं जान पायेगा
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Twitter shayarish by shubhangi

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