जो रोटी में थूक के कांटे बो रहे हैं उनके लिए कोई शायरी न निकली। काश बांध लेते ज…

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जो रोटी में थूक के कांटे बो रहे हैं उनके लिए कोई शायरी न निकली।

काश बांध लेते जबानी सफर
न कांटे बिछते, न निकालने की सिफारिश करते

थूकलमान https://t.co/anLoKFnwy4
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Source by नरेंद्र

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