जिस रोज मोहब्बत लफ़्जों मे बया ना हो पाए, शायर शायरी में उसे सजा ना पाए, गजलगो ग…

जिस रोज मोहब्बत लफ़्जों मे बया ना हो पाए,
शायर शायरी में उसे सजा ना पाए,
गजलगो गजल में उसे उतार ना पाए,
उस रोज समझ लेना इबादत के बहुत करीब है वो मोहब्बत।
🕊️💐❤️🕊️
जिस रोज मोहब्बत लफ़्जों मे बया ना हो पाए,
शायर शायरी में उसे सजा ना पाए,
गजलगो ग…

जिस रोज मोहब्बत लफ़्जों मे बया ना हो पाए,
शायर शायरी में उसे सजा ना पाए,
गजलगो गजल में उसे उतार ना पाए,
उस रोज समझ लेना इबादत के बहुत करीब है वो मोहब्बत।
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