ज़िन्दगी अब किस तरह बसर होगी, दिल नहीं लग रहा महोबत्त में, वह है जान हर एक महफि…

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ज़िन्दगी अब किस तरह बसर होगी,
दिल नहीं लग रहा महोबत्त में,
वह है जान हर एक महफिल की,
हम भी घर से अब कम निकलते है,
क्या तकल्लुफ करे यह कहने में,
जो भी खुश है, हम उससे जलते है!
#हिंदी #शायरी #TheSecretShayar
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Source by TheSecretShayar

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