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ज़रा से बिखरे हुए ग़म भी हैं, 

शायरी पर केवल ल़फ्ज़ नहीं…
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ज़रा सी फैली स्याही है ज़रा से बिखरे हुए ग़म भी हैं,  शायरी पर केवल ल़फ्ज़ नहीं…

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ज़रा सी फैली स्याही है
ज़रा से बिखरे हुए ग़म भी हैं, 

शायरी पर केवल ल़फ्ज़ नहीं
छुपे हुए कुछ हम भी हैं…😊 https://t.co/2Lckn0aHHk
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Source by Rσʂԋαɳ 🚩

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