जरुरी नहीं है कि जो ‘डायरी’ में दर्ज़ की जाय वही अच्छी ‘शायरी’ है; ‘ओस की बूंदें…

जरुरी नहीं है कि जो ‘डायरी’ में दर्ज़ की जाय वही अच्छी ‘शायरी’ है;
‘ओस की बूंदें’ जब भी पत्ते पर गिरती है, तो मुकम्मल ‘गज़ल’ हो जाती है।
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@Nehathink
@SahityikKala
@kavitaaayein @Im_pradyumn @sahityasrijan @literaturalRows @shabdmusafir1 @Kavi_Ghar
जरुरी नहीं है कि जो ‘डायरी’ में दर्ज़ की जाय वही अच्छी ‘शायरी’ है;
‘ओस की बूंदें…

जरुरी नहीं है कि जो ‘डायरी’ में दर्ज़ की जाय वही अच्छी ‘शायरी’ है;
‘ओस की बूंदें’ जब भी पत्ते पर गिरती है, तो मुकम्मल ‘गज़ल’ हो जाती है।
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Twitter shayarish by सौरभ

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