ग़म मिलते हैं तो और निखरती है शायरी यह बात है तो सारे ज़माने का शुक्रिया अब मुझ…

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ग़म मिलते हैं तो और निखरती है शायरी
यह बात है तो सारे ज़माने का शुक्रिया

अब मुझको आ गए हैं मनाने के सब हुनर
यूँ मुझको “दीप” भूल के जाने का शुक्रिया….!
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Source by Renu Sharma

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