क्या सनम..! इतना क्यों सितम ढाये जा रहे हो आज मुझको कल उनको ऐसे ही सारे जहां को …

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क्या सनम..!
इतना क्यों सितम ढाये जा रहे हो
आज मुझको
कल उनको
ऐसे ही सारे जहां को पटाये जा रहे हो
इतनी जल्दी क्या हैं
जो बिन बारीश बरसात कराए जा रहे हों
क्या सनम..!
इतना क्यो सितम ढाये जा रहे हो.
#बज़्म
#शायरांश
#शायरी
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Source by 𝐍𝐈𝐓𝐄𝐒𝐇 𝐒𝐈𝐍𝐆𝐇 ( नितेश सिंह )

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