कुर्बान क्यों होउ उस शख्सियत के लिए, मेहरबान जो न हुए मेरे बुरे वक़्त के लिए !!

कुर्बान क्यों होउ उस शख्सियत के लिए,
मेहरबान जो न हुए मेरे बुरे वक़्त के लिए !!

तकदीर को तो बनने में वक़्त लगता है जनाब,
पर लड़ना तो हरमुम्किन है अपने हक के लिए…!

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कुर्बान क्यों होउ उस शख्सियत के लिए,
मेहरबान जो न हुए मेरे बुरे वक़्त के लिए !!

कुर्बान क्यों होउ उस शख्सियत के लिए,
मेहरबान जो न हुए मेरे बुरे वक़्त के लिए !!

तकदीर को तो बनने में वक़्त लगता है जनाब,
पर लड़ना तो हरमुम्किन है अपने हक के लिए…!

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Twitter shayarish by Bibhangshu sarma

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