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इस  जुस्तजू में तो हमने पूरा शहर छान मारा है…
कि-गम-–ए-–इश्क-का-कोई-किनारा-है-इस-जुस्तजू

कि गम –ए –इश्क का कोई किनारा  है… इस  जुस्तजू में तो हमने पूरा शहर छान मारा है…

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कि गम –ए –इश्क का कोई किनारा  है…
इस  जुस्तजू में तो हमने पूरा शहर छान मारा है.

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Source by कवि रवि रंजन ✍️✍️

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