इश्क़ का होना भी लाज़मी है शायरी के लिए… वरना कलम लिखती तो दफ्तर का बाबू भी …

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इश्क़ का होना भी लाज़मी है शायरी के लिए…

वरना

कलम लिखती तो दफ्तर का बाबू भी गालिब होता…✨⚡️
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Source by Tinkerbell 11:11