*इश्क़ का होना भी लाजमी है शायरी के लिये,* *अगर सिर्फ कलम लिखती, तो दफ्तर का बा…

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*इश्क़ का होना भी लाजमी है शायरी के लिये,*

*अगर सिर्फ कलम लिखती, तो दफ्तर का बाबू भी ग़ालिब होता..!!*
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Source by Vijay💓Verma

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