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सच कहें!शायरी नहीं होती

वो तो क़िरदार है सन्दल,वरना
सा…
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आँख में गर नमी नहीं होती सच कहें!शायरी नहीं होती वो तो क़िरदार है सन्दल,वरना सा…

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आँख में गर नमी नहीं होती
सच कहें!शायरी नहीं होती

वो तो क़िरदार है सन्दल,वरना
सांप की दोस्ती नहीं होती

जिस्म के घाव गर नहीं गाते
बांसुरी,बांसुरी नहीं होती

नींव के संग की ही होती है
गुम्बदों की हँसी नहीं होती

ख़्वाब हो जाते हम अगर माँ ने
आँख गिरवी रखी नहीं होती

#सूरज_राय सूरज https://t.co/CbaarG2yuK
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Source by @काव्य_रस

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