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मुझे लाज़मी सी लगती है, 

लिखती हूँ जब तेरे बार…
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अब मेरी शायरी में तेरी मौजूदगी, मुझे लाज़मी सी लगती है, लिखती हूँ जब तेरे बार…

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अब मेरी शायरी में तेरी मौजूदगी,
मुझे लाज़मी सी लगती है,

लिखती हूँ जब तेरे बारे में,
तो शायरी मेरी चाशनी सी लगती है,

जितना भी तुझको मैं सोचूँ,
उतनी ही तिश्नगी सी लगती है,

जब देखती हूँ मुस्कुराता चेहरा तेरा,
तो ज़िन्दगी, ज़िन्दगी सी लगती हैं….

#Musings #FridayThoughts https://t.co/kx8uzvf8ns
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Source by RINKY

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