“Koi Toh Ho”-Nidhi Narwal Spoken Word Spill Poetry

“Koi Toh Ho”-Nidhi Narwal Spoken Word Spill Poetry

ढूंढ रहा हूं….

कभी रात के अंधेरों में
तो कभी सुबह के हवाओं में,
पता नही क्या
बस ढूंढ़ रहा हूं।

कभी वक़्त की गहराइयों में
तो कभी आसमां के तन्हाइयो में,
रेगिस्तान के रेतो में
तो कभी नदियों के किनारों में|

दूसरों के दुखो के एहसासों में
तो कभी खुशियों में,
ढूंढ रहा हूं अपना वजूद
मै कौन हूं और कहां हूं ||

Leave a Reply